धनबाद । महिला थाना में मामले का निष्पादन और समझौता कम होता है, जबकि वसूली और दलाली ज्यादा। यह कहना है महिला थाना पहुंचने वाले भुक्तभोग़ियों का।
बताया जाता है कि महिलाएं अपनी समस्याओं और घरेलू झगड़ों को लेकर जब महिला थाना का रूख करती है तो वहां कुंडली मारकर बैठे दलाल चंद पुलिसकर्मियों के इशारे पर पीड़ित और प्रभावित दोनों पक्ष का आर्थिक दोहन शुरू कर देते है।
ऐसी ही एक घटना में गुरुवार को महिला थाना के पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में थाने के भीतर दो पक्षों के बीच जमकर मारपीट और गाली-गलौज की घटना घटी। वहां मौजूद पुलिस मूकदर्शक बनकर तमाशा देखती रही। परंतु जब मीडिया के लोग झड़प व मारपीट की तस्वीरें लेने लगे, तो एक-एक कर वहां मौजूद महिला थाना के पुलिस कर्मी धीरे-धीरे सरक लिए।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जब दो पक्षों में झड़प का मामला थाने के समक्ष आता है तो दोनों पक्ष के तरफ से दर्जनों लोगों को थाने के भीतर एक जगह एकत्रित होने पर पुलिस अंकुश क्यों नहीं लगाती?
वही लोगों का यह भी कहना है कि महिला थाना में रोजाना गाली-गलौज और आपस में मारपीट आम बात हो गई है। स्थिति इतनी बदतर है कि वहां रोजाना होने वाली घटनाओं को देखकर कोई आम और शरीफ आदमी थाने के भीतर जाने से पहले सौ बार सोचता है…क्योंकि थाना भवन में घुसते ही रणक्षेत्र का नजारा दिखने लगता है।
