लालटू मिठारी

बलियापुर । कुम्हार टोला बलियापुर में सप्ताह व्यापी श्री श्री रामचरितमानस कथा के दूसरे दिन अयोध्या के अवधेश जी महाराज ने शिव विवाह पर प्रवचन किया। भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा करने से वैवाहिक जीवन समस्याएं दूर रहती है ।साथ ही जिन लोगों के विवाह में देरी हो रही है ।सच्ची प्रेम की प्राप्ति करना चाहते हैं उन्हें शिव पार्वती की आराधना अवश्य करनी चाहिए ।कहा कि हमारे इष्ट देव के कार्यक्रम हमें हमारी धार्मिकता से अवगत कराते हैं ।धार्मिक आयोजन मन को तृप्ति मिलती है ।माता पार्वती भगवान शिव से विवाह करने की इच्छुक थी ।सभी देवतागण भी इसी मत से सहमत थे । पार्वती का विवाह शिव से हो, शिव को अपना वर बनाने के लिए माता पार्वती ने बहुत कठोर तपस्या शुरू कर दी ,उनकी तपस्या के चलते भोलेनाथ पिघल गए और उनसे विवाह करने के लिए राजी हो गए। भगवान शिव ने अपनी बारात में भूत प्रेत और चुड़ैलों की बारात में साथ ले जाने का निर्णय किया।

जब यह अनोखी बारात पार्वती के द्वारा पहुंची सभी देवता देख हैरान हो गये। वहां खड़ी महिलाएं भी डर कर भाग गई ,भगवान शिव को इस विचित्र रूप में पार्वती की मां स्वीकार नहीं कर पाई और उन्होंने और अपनी बेटी का हाथ देने से मना कर दिया ।जब भगवान शिव दिव्य रूप में पहुंचे तो पार्वती की मां ने उन्हें तुरंत स्वीकार कर लिया और ब्रह्मा जी की उपस्थिति में विवाह समारोह शुरू हो गया ।माता पार्वती और भोले बाबा ने एक दूसरे को वरमाला पहनाई और पार्वती की विवाह संपन्न हुआ ।कार्यक्रम में मुखिया विजय गोराई निर्मल कुंभकार गुरु पद कुंभकार सपन गोराई शंकर कुंभकार सुनील गोराई किशोर कुंभकार विजय कुंभकार लखन गोराई आदि मौजूद थे।

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