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धनबाद : कबाड़ को अनुपयोगी समझकर फेंक देने वालों के लिए धनबाद रेल मंडल ने दिया उदाहरण

धनबाद । कबाड़ को अनुपयोगी समझकर फेंक देने वालों के लिए धनबाद रेल मंडल ने एक उदाहरण पेश किया है। अब कबाड़ फेंकने की चीज नहीं, बल्कि जरूरी चीज में तब्दील हो गई है। ऐसा संभव करने वाले धनबाद रेल मंडल के कोचिंग डिपो को पूर्व मध्य रेलवे काफी सम्मान की दृष्टि से देख रहा है। यह गौरव धनबाद रेल मंडल के कोचिंग डिपो के अधिकारियों एवं कर्मियों के मेहनत का परिणाम है। कोचिंग डिपो के इंचार्ज मुकुंद बिहारी ने बताया कि चलती ट्रेनों में ब्रेक वाइंडिंग की समस्या से वह लोग हमेशा दो-चार होते रहते है।

इसे दूर करने के लिए लाखों रुपए की कीमत वाले मशीन और ट्रेनों को रोक कर लगभग 20 मिनट का समय उन्हें लगता था। जोकि कबाड़ से बने धनबाद गजट नामक उपकरण से काफी कम समय में दूर किया जा सकता है। इसे बनाने की लागत भी कुछ हजार रुपए ही हैं। जिससे रेलवे में खर्च कटौती के आदेश को सार्थकता मिली है। मालूम हो कि वैश्विक महामारी कोरोना काल के लॉकडाउन के दौरान भारतीय रेल में खर्च कम करने के लिए कटौती का आदेश जारी हुआ था।

जिसके बाद धनबाद रेलवे के कोचिंग डिपो के अधिकारी और यांत्रिक अभियंता ने मिलकर ब्रेक बाइंडिंग में आने वाली दिक्कतों को दूर करने के लिए कबाड़ से उपकरण बना डाला। कई चरणों में उसकी ट्रायल भी की गई और वह कसौटी पर खरा उतरा। ऐसे में पूर्व मध्य रेलवे ने अपने अधीन के कोचिंग डिपो में धनबाद गैजेट के नाम से इस उपकरण को इस्तेमाल करना भी शुरू कर दिया।

इस बाबत यांत्रिक अभियंता मुकुंद कुमार से बातचीत करने पर पता चला है कि ब्रेक वाइंडिंग की समस्या आने पर ट्रेनों को कम से कम 20 मिनट तक रोकना पड़ता था और तब जाकर उस समस्या को दूर किया जाता था। ऐसे में कबाड़ से उन लोगों ने गैजेट बनाकर इस समस्या को दूर किया और ब्रेक वाइंडिंग समस्या को दूर करने के लाखों रुपए की कीमत वाले मशीन को दरकिनार कर, कम लागत में अच्छी सुविधा प्रदान किया।

जो पूर्व मध्य रेलवे में आज इस्तेमाल किया जा रहा है। रेलवे द्वारा इस धनबाद गैजेट को स्वीकारने के बाद उनका मनोबल बढ़ा हुआ है, तथा वह आने वाले दिन में इसी तरह कम लागत पर जरूरी उपकरण निर्माण के लिए प्रयासरत रहेंगे।

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