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हजारीबाग : पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के आठवें रूप “महागौरी” की पूजा अर्चना की

रामावतार स्वर्णकार :

सर्वमंगलमगंले शिवे सर्वार्थसाधिके ।  शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते।।

हजारीबाग /इचाक । बुधवार को महा अष्टमी के दिन प्रखंड के विभिन्न पूजा पंडालों में श्रधालुओं ने माँ मां दुर्गे के आठवें रूप “महागौरी” की पूजा अर्चना की गई। आदर्श इंटर कालेज के शिक्षक मनोज कुमार ने कहा भगवती का अष्टम स्वरूप “माता महागौरी” है। शिव जी को वर के रूप में पाने की इच्छा लिए वर्षों तक हिमालय पर कठिन तपस्या करते समय माता का शरीर धूल-धूसरित होकर मलिन हो गया था।

तब अंतत: शिवजी प्रसन्न हुए और फिर उन्होंने गंगा जल से माता को मलकर धोया तदुपरांत उनका शरीर चंद्र व कुन्द पुष्प की भांति गौरवर्ण का हो गया,इसीलये उन्हें “महागौरी” कहा जाता है। देवी महागौरी के वस्त्र एवं आभूषण श्वेत हैं जिसके कारण इन्हें श्वेतांबरी भी कहा जाता है । इनकी चार भुजाएँ हैं तथा वाहन वृषभ है । दाहिनी भुजा अभय मुद्रा और दूसरी भुजा में त्रिशूल है । बायीं भुजा में डमरू और नीचे की बायीं भुजा वर मुद्रा में हैं।

माता महागौरी की कृपा से आलौकिक सिद्धियों की प्राप्ति होती है।माता की उपासना से आर्तजनों के असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं और सारे कष्टों से मुक्ति मिलती है। भक्तों के पूर्व संचित पाप को माता हर लेतीं हैं। अमोघ शक्ति व फलदायिनी देवी व सुहागिनों को अखंड सौभाग्य का वरदान प्रदान करने वाली माता श्वेतांबरी महागौरी को बारम्बार प्रणाम!

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