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नवरात्रि की महानवमी : महानवमी आज करें मां सिद्धिदात्री की पूजा

शारदीय नवरात्रि में घटस्थापना, कलश पूजा, माता की पूजा, आरती, सभी कुछ मुहूर्त में किया जाता है। नवरात्रि में नवमी और दशमी की पूजा बहुत महत्वपूर्ण होती है। इस पूजा में मुहूर्त का बड़ा महत्व होता है। देश के कई स्थानों पर आज महानवमी के दिन ही नवरात्रि का हवन होता है। नवरात्रि का हवन विजयादशमी को भी किया जाता है। दुर्गा महानवमी के दिन कन्या का पूजन भी होता है।

मां सिद्धिदात्री का स्वरुप : मां सिद्धिभुजा दात्री का स्वरुप बेहद निराला और आभामंडल से युक्त है। मां सिद्धिदात्री लाल रंग की साड़ी पहने हुए कमल पर विराजमान हैं। मां की चार भुजाएं हैं। बाईं भुजा में मां ने गदा धारण किया है और दाहिने हाथ से मां कमल पकड़ा है और आशीर्वाद दे रही हैं। मां के हाथों में शंख और सुदर्शन चक्र भी है। मां पालथी मारकर कमल पर बैठी हैं। उनका एक चरण नीचे की तरफ है।

मां सिद्धिदात्री-पौराणिक मान्यता : देवीपुराण में इस बात का उल्लेख है कि भगवान शिव ने सिद्धियां प्राप्त करने के लिए मां सिद्धिदात्री का तप किया तब जाकर कहीं उनका आधा शरीर स्त्री का हुआ। देवी के आशीर्वाद के कारण ही भगवान शिव अर्द्धनारीश्वर के रूप में जाने गए।

नवरात्रि के 9वें दिन मां नव दुर्गा के नवमें रूप मां सिद्धिदात्री की पूजा अर्चना के बाद नवमी तिथि को नवरात्रि व्रत का पारण करने वाले लोग कन्या पूजन के बाद अपना व्रत खोल सकेंगे। आज नवरात्रि का अंतिम दिन यानी कि नवमी है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा अर्चना करने से भक्तों को विशेष सिद्धियों की प्राप्ति होती है। मान्यता तो यह भी है कि भोले शंकर महादेव ने भी सिद्धि प्राप्त करने के लिए मां सिद्धिदात्री तपस्या की थी। नवरात्रि की नवमी के दिन भी कुछ लोग कन्या पूजन करते हैं और व्रत का पारण करते हैं।

नवमी तिथि : यह तिथि का प्रारंभ 13 अक्टूबर 2021 दिन बुधवार को रात 08 बजकर 09 मिनट और 56 सेकंड से प्रारंभ होकर 14 अक्टूबर 2021 दिन बृहस्पतिवार को शाम 06 बजकर 54 मिनट और 40 सेकंड पर समाप्त होगी। अत: नवमी का पूजन 14 अक्टूबर 2021, दिन गुरुवार को किया जाएगा।

नवरात्रि हवन का महत्व : धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि में दुर्गा अष्टमी और महानवमी के दिन हवन करने से शुभता में वृद्धि होती है। घर का वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है। शुद्धता बढ़ती है। हवन सामग्री के औषधीय गुणों से रोग भी दूर होते हैं। हवन एक वैदिक कर्मकांड है। हिन्दू धर्म में हर पूजा के बाद हवन का विधान है।

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