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धनबाद : दुर्गा पूजा के महासप्तमी पर कोलाबोउ-नवपत्रिका पूजा सम्पन्न

धनबाद । कोयलांचल समेत देश-विदेश में दुर्गा पूजा का त्यौहार पूरे धूमधाम से मनाया जा रहा है। 7 अक्टूबर को कलश स्थापना के साथ ही दुर्गा पूजा का शुभारंभ हो चुका है। दुर्गा पूजा में मां दुर्गा के नौ रूप की पूजा-अराधना होती है। इसी क्रम में सप्तमी के दिन विशेष पूजा होती है, जिसे नवपत्रिका पूजा और या कोलाबोउ पूजा के नाम से जाना जाता है।
बंगाली कल्याण समिति ने शहर के जिला परिषद प्रांगण में प्रत्येक वर्ष की तरह मां दुर्गा की पूजा की जा रही है। जहां बंगाली समुदाय के परिवार पूरे धूमधाम से विधि पूर्वक माता के पूजा आयोजन में जुटे दिखे।

दुर्गा पूजा में महा सप्‍तमी के दिन नवपत्रिका या नबपत्रिका पूजा का विशेष महत्‍व है। नवपत्रिका का इस्‍तेमाल दुर्गा पूजा में होता है और इसे महासप्‍तमी के दिन पूजा पंडाल में रखा जाता है। बंगाल तथा आसपास के इलाकों में इसे ‘कोलाबोऊ पूजा’ के नाम से भी जाना जाता है। कोलाबाऊ को गणेश जी की पत्‍नी माना जाता है। बंगाल, ओडिशा, बिहार, झारखंड, असम, त्रिपुरा और मणिपुर में नवपत्रिका पूजा धूमधाम के साथ मनाई जाती है। इन इलाकों में पूजा पंडालों के अलावा किसान भी नवपत्रिका पूजा करते हैं। किसान अच्‍छी फसल के लिए प्रकृति को देवी मानकर उसकी आराधना करते हैं।
नवपत्रिका पूजा में नौ अलग-अलग पेड़ों के पत्तों को मिलाकर नवपत्रिका तैयार की जाती है। इसे तैयार करने में केला, कच्‍वी, हल्‍दी, जौ, बेल पत्र, अनार, अशोक, अरूम और धान के पत्तों का इस्‍तेमाल किया जाता है। हर एक पत्ते को मां दुर्गा के अलग-अलग नौ स्‍वरूपों का प्रतीक माना जाता है।
केले के पत्ते : ब्राह्मणी का प्रतीक।
कच्‍वी (Colocasia) के पत्ते : मां काली का प्रतीक।
हल्‍दी के पत्ते : मां दुर्गा का प्रतीक।
जौ की बाली : देवी कार्तिकी का प्रतीक।
बेल पत्र : भगवान शिव का प्रतीक।
अनार के पत्ते : देवी रक्‍तदंतिका का प्रतीक।
अशोक के पत्ते : देवी सोकराहिता का प्रतीक।
अरूम के पत्ते : मां चामुंडा का प्रतीक।
धान की बाली : मां लक्ष्‍मी का प्रतीक।

महास्‍पती के दिन महास्‍नान का विशेष महत्‍व है। इस दिन मां दुर्गा की प्रतिमा के आगे शीशा रखा जाता है। शीशे पर पड़े रहे मां दुर्गा के प्रतिबिंब को स्‍नान कराया जाता है, जिसे महास्‍नान कहते हैं।

नवपत्रिका की पूजा में सभी नौ पत्तियों को एक साथ बांधकर उसे अलग-अलग पानी से नहलाया जाता है। सबसे पहले गंगाजल से स्‍नान कराया जाता है। इसके बाद बारिश के पानी, सरस्‍वती नदी का जल, समुद्र का जल, कमल वाले तालाब का पानी और आखिर में झरने के पानी से नवपत्रिका को स्‍नान कराया जाता है। स्‍नान के बाद नवपत्रिका को लाल पाड़ की साड़ी पहनाई जाती है।
मान्‍यता है कि किसी नई-नवेली दुल्‍हन की तरह नवपत्रिका को सजाना चाहिए। महास्‍नान के बाद मां दुर्गा की प्रतिमा को पंडाल में रखा जाता है। मां दुर्गा की प्राणप्रतिष्‍ठा के बाद षोडशोपचार पूजा की जाती है। नवपत्रिका को पूजा के स्‍थान पर ले जाकर चंदन और फूल अर्पित किए जाते हैं। फिर नवपत्रिका को गणेश जी के दाहिने ओर रखा जाता है। आखिर में मां दुर्गा की महा आरती के बाद प्रसाद वितरण किया जात है।

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